साहित्य और समाज: उपेक्षित वर्ग एवं अभिव्यक्ति

लेखक

  • अमर वर्मा University of Delhi image/svg+xml Author
    • Writing – Original Draft Preparation

शोधशब्द:

साहित्य, समाज, जन सामान्य, सामाजिक स्थिति

गोषवारा

प्रत्येक देश का साहित्य उस देश के मनुष्यों के हृदय का आदर्श रूप है। जो जाति जिस समय जिस भाव से परिपूर्ण या परिलुप्त रहती है, वे सब उसके भाव उस समय के साहित्य की समालोचना से अच्छी तरह प्रगट हो सकते हैं। साहित्य न केवल मनुष्य के हृदय में नैतिक मूल्यों का सृजन, राष्ट्र के प्रति प्रेम भावना का प्रबल प्रवाह तथा मानव मन को उत्साह एवं उमंग से भरता है बल्कि साहित्य, समाज में हाशिए पर पहुँच चुके लोगों अथवा समाज में पीछे छूट चुके लोगों को भी हमारे समक्ष प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है। रवींद्रनाथ टैगोर की निबंध 'काव्येर उपेक्षिता' तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी कृत निबंध 'कवियों की उर्मिला विषयक उदासीनता' से प्रेरणा ग्रहण करते हुए मैथिलीशरण गुप्त ने 'भारत-भारती' नामक काव्य का सृजन किया। 

इस रचना के माध्यम से हमारे साहित्य से विस्मृति हो चुकी स्त्री पात्र 'उर्मिला' को हमारे सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा 'यशोधरा' नामक कृति के द्वारा मैथिलीशरण गुप्त ने गौतम बुद्ध की पत्नी को जो साहित्य से लगभग विस्मृत हो चुकी होती है, उनको हमारे सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि साहित्य समाज का वह दर्पण है जो समाज की कमियों को उजागर करते हुए समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य भी करता है। 

बीज शब्द :- साहित्य, समाज, जन सामान्य, सामाजिक स्थिति।

224 137

डाउनलोड्स

डाउनलोड्सची आकडेवारी अद्याप उपलब्ध नाही.

संदर्भ

1. डॉ. धीरेंद्र वर्मा, हिंदी साहित्य कोश, भाग-1, पृ. 920

2. आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, पृष्ठ-25, सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन

3. आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, 'साहित्य की महत्ता' निबंध से।

4. बालकृष्ण भट्ट, 'साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है' निबंध से

5. मुंशी प्रेमचंद, प्रेमचंद की 51 लोकप्रिय कहानीयां, दिव्यांश पब्लिकेशन, पृष्ठ संख्या – 15

6. ओमप्रकाश वाल्मीकि, जूठन प्रथम खंड, पृष्ठ- 19-20, राधाकृष्ण पेपरबैक्स

डाउनलोड्स

प्रकाशित

2026-06-30

अंक

विभाग

Articles

प्रवर्ग (Categories)

उद्धरणे कशी द्यावीत

साहित्य और समाज: उपेक्षित वर्ग एवं अभिव्यक्ति. (2026). Aethel Research Digest Juncture: An International Journal, 2(3), 32-38. https://ardjij.com/index.php/ardjij/article/view/36