आचार्य रामचंद्र शुक्ल की काव्य-दृष्टि : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. तोंडाकुर एल.पी Author
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Keywords:

रामचंद्र शुक्ल, काव्य-दृष्टि, आधुनिक कविता, अंतर्विरोधों, प्रासंगिकता, तुलसी, लोकमंगल

Abstract

https://doi.org/10.5281/zenodo.19694506

यह शोधप्रपत्र आचार्य रामचंद्र शुक्ल की काव्य-दृष्टि का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक हिंदी काव्यालोचना के विकास में उनकी विचार-पद्धति किस प्रकार प्रेरक, प्रभावकारी और बहुस्तरीय भूमिका निभाती है। केदारनाथ सिंह द्वारा लिखित निबंध ‘आचार्य शुक्ल की काव्य-दृष्टि और आधुनिक कविता’ को आधार बनाकर इस अध्ययन में शुक्ल की आधुनिकता-विचारधारा, सामंजस्य-सिद्धांत, भाषा-बोध, रीतिकाल-विवेचना और आधुनिक कविता के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं की पुनर्पाठ की गयी है।

शोध से यह उभरकर सामने आता है कि शुक्ल ‘आधुनिकता’ को मात्र समयबद्ध परिवर्तन न मानकर एक मूल्यपरक सह-अनुभूति के रूप में देखते हैं, जो साहित्य को बदलती हुई सामाजिक-मानसिक संरचनाओं के साथ जोड़ती है। उनका सामंजस्य-सिद्धांत काव्य-निर्णय का महत्वपूर्ण निकष अवश्य है, परंतु आधुनिक कविता की बहुविध प्रवृत्तियों—विशेषतः मुक्तछंद, अतुकांत और नवभाषाई प्रयोगों—के संदर्भ में यह सिद्धांत सीमित प्रतीत होता है। भाषा-संबंधी विचारों में शुक्ल की वरीयताएँ, विशेषकर अवधी-ब्रज के प्रति उनका आग्रह और खड़ीबोली की प्रयोगशीलता पर उनकी शंकाएँ, उनके भाषिक पूर्वग्रह को उजागर करती हैं। फिर भी, उनकी आलोचना की ऐतिहासिकता, सांस्कृतिक संदर्भों की पहचान और साहित्य के सामाजिक सरोकारों पर उनका जोर हिंदी आलोचना को बौद्धिक आधार प्रदान करता है।

अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि शुक्ल की काव्य-दृष्टि में निहित अंतर्विरोध उस समय के संक्रमणशील साहित्यिक और सामाजिक परिदृश्य को प्रतिबिंबित करते हैं। केदारनाथ सिंह के माध्यम से किए गए पुनर्मूल्यांकन से यह स्पष्ट होता है कि शुक्ल की सीमाएँ होते हुए भी उनकी दृष्टि हिंदी साहित्य के सौंदर्यबोध, इतिहास-दृष्टि और आलोचना-परंपरा के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण और आज भी प्रासंगिक बनी हुई है।

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Author Biography

  • डॉ. तोंडाकुर एल.पी

    हिंदी विभाग, महिला कला महाविद्यालय, बीड (महाराष्ट्र)

References

1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल – हिंदी साहित्य का इतिहास।

2. आचार्य रामचंद्र शुक्ल – कविता क्या है, लोकमंगल की साधनावस्था, रसात्मक बोध, काव्य में प्रकृति दृश्य।

3. केदारनाथ सिंह – आचार्य शुक्ल की काव्य-दृष्टि और आधुनिक कविता।

4. नामवर सिंह – हिंदी आलोचना का विकास।

5. डॉ. रामविलास शर्मा – आचार्य शुक्ल और हिंदी आलोचना।

6. केदारनाथ सिंह- मेरे समय के शब्द ।

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Published

2025-12-13

How to Cite

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की काव्य-दृष्टि : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2025). Aethel Research Digest Juncture: An International Journal, 1(1), 32-40. https://ardjij.com/index.php/ardjij/article/view/11